
Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana 2025: ऑनलाइन रेजिस्ट्रेशन, लिस्ट और लास्ट डेट प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2025
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2025 किसानों को फसल नुकसान पर बीमा कवरेज और मुआवजा प्रदान करने वाली महत्वपूर्ण योजना है। यहाँ इसके लाभ, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और दस्तावेजों की पूरी जानकारी सरल हिंदी में पढ़ें।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2025
Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana 2025: ऑनलाइन रेजिस्ट्रेशन, लिस्ट और लास्ट डेट
भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां की अर्थव्यवस्था में खेती और किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। हमारे देश में करोड़ों किसान हैं जिनकी रोज़ी-रोटी पूरी तरह खेती पर ही निर्भर करती है। लेकिन हर सीजन में खेती करना आसान काम नहीं होता। कभी मौसम खराब हो जाता है, कभी बेमौसम बारिश, कभी तेज ओलावृष्टि, बाढ़, सूखा या कीटों का हमला किसानों की मेहनत को पल भर में नष्ट कर देता है। ऐसे में किसान आर्थिक तंगी और कर्ज़ के बोझ से परेशान हो जाते हैं।
इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने 18 फरवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana – PMFBY) की शुरुआत की। इस योजना का उद्देश्य किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में बीमा कवरेज और मुआवजा प्रदान करना है, ताकि उनकी आय स्थिर रहे और वे बिना डर के खेती जारी रख सकें। समय के साथ इस योजना में कई सुधार किए गए हैं और 2025 में यह योजना किसानों के लिए और अधिक लाभकारी साबित हो रही है
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2025 क्या है?
यह एक सरकारी बीमा योजना है जिसके माध्यम से खेती के दौरान होने वाले प्राकृतिक या अन्य प्रकार के नुकसान की भरपाई सरकार द्वारा दी जाती है। किसान बहुत ही कम प्रीमियम भरकर अपनी फसलों को सुरक्षित कर सकते हैं। एक तरह से यह योजना किसानों की आर्थिक सुरक्षा का कवच है, जो उन्हें अनिश्चित मौसम और आपदाओं से बचाती है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय को सुरक्षित करना और उन्हें आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इसके अलावा इस योजना के कुछ खास उद्देश्य इस प्रकार हैं:
- प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों से फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता देना।
- किसानों की आर्थिक स्थिरता बनाए रखना ताकि वे खेती छोड़ने के बारे में न सोचें।
- आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना।
- फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना।
- किसानों को साहूकारों और महंगे कर्ज से बचाना।
- कृषि क्षेत्र में स्थिरता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना।
सरकार का मानना है कि अगर किसानों की आय सुरक्षित रहेगी, तो वे खेती के क्षेत्र में और आगे बढ़ पाएंगे।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रमुख लाभ
यह योजना किसानों के लिए कई तरह से फायदेमंद साबित हुई है। इसके लाभ इस प्रकार हैं:
- अत्यंत सस्ती प्रीमियम दर
सरकार ने प्रीमियम दरें किसानों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए बहुत कम रखी हैं।
खरीफ फसल: बीमा राशि का केवल 2 प्रतिशत
रबी फसल: बीमा राशि का 1.5 प्रतिशत
व्यावसायिक और बागवानी फसलें: 5 प्रतिशत
इसके अलावा उत्तरी-पूर्वी राज्यों, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के किसानों को पूरा प्रीमियम सरकार द्वारा दिया जाता है।
- व्यापक कवरेज
यह योजना कई प्रकार के जोखिमों को कवर करती है, जैसे:
बाढ़, सूखा, तूफान, ओलावृष्टि
कीट और बीमारियां
कटाई के बाद 14 दिनों तक का फसल नुकसान
इसके कारण किसानों को व्यापक सुरक्षा मिलती है।
- समय पर मुआवजा
सरकार ने दावा निपटान की समय सीमा दो महीने रखी है, ताकि किसानों को आर्थिक सहायता समय पर मिल सके। यह किसानों को कर्ज के बोझ से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- तकनीक आधारित सर्वे
ड्रोन, सैटेलाइट, मोबाइल एप और डिजिटल तकनीकों की मदद से फसल नुकसान का आकलन अत्यंत सटीकता से किया जाता है। इससे दावों की प्रक्रिया पारदर्शी बनती है और किसानों को सही मुआवजा मिलता है।
कौन-कौन से जोखिमों को योजना कवर करती है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना कृषि से जुड़े कई प्रकार के नुकसान को कवर करती है। इनमें शामिल हैं:
- उपज हानि
आग, बिजली, तूफान, बाढ़, सूखा, कीट और बीमारियों से फसल को हुए नुकसान पर मुआवजा मिलता है। - बुवाई न हो पाना
कई बार खराब मौसम के कारण खेत में बुवाई नहीं हो पाती। ऐसे में बीमा राशि का 25% तक मुआवजा मिलता है। - कटाई के बाद हानि
अगर कटाई के बाद 14 दिनों के भीतर बाढ़ या बारिश से फसल खराब हो जाए, तो भी इस योजना के तहत कवरेज मिलता है। - स्थानीय आपदाएं
ओलावृष्टि, भूस्खलन, बाढ़ और अन्य स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान पर भी सहायता प्रदान की जाती है।
कौन ले सकता है योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान को कुछ पात्रता शर्तें पूरी करनी होती हैं।
सभी प्रकार के किसान जैसे भूस्वामी, बटाईदार और पट्टेदार आवेदन कर सकते हैं।
केवल अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसलें बोनी जरूरी है।
किसान के पास भूमि स्वामित्व या पट्टे का प्रमाण होना चाहिए।
बुवाई शुरू होने के दो सप्ताह के भीतर आवेदन करना आवश्यक है।
अगर किसी किसान को पहले बीमा दावा मिल चुका है, तो दोबारा दावा उन्हीं शर्तों पर मिलेगा।
किन चीजों को नहीं मिलता कवरेज?
कुछ मामलों में योजना कवरेज नहीं देती, जैसे:
गैर-अधिसूचित क्षेत्र में नुकसान
फसल चक्र से बाहर हुए नुकसान
किसान की लापरवाही से हुई क्षति
प्रीमियम न भरने पर बीमा दावा अस्वीकार
आवेदन प्रक्रिया
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से किया जा सकता है।
ऑनलाइन आवेदन
- आधिकारिक वेबसाइट pmfby.gov.in पर जाएं।
- Farmer Corner में जाकर Guest Farmer पर क्लिक करें।
- पंजीकरण फॉर्म भरें और लॉगिन करें।
- आवेदन पत्र भरें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
- प्रीमियम जमा करें और रसीद डाउनलोड करें।
ऑफलाइन आवेदन
अगर किसान ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते, तो वे निम्न माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं:
कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)
निकटतम बैंक शाखा
कृषि कार्यालय
आवश्यक दस्तावेज
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ दस्तावेज जरूरी हैं। इनमें शामिल हैं:
पासपोर्ट साइज़ फोटो
आधार कार्ड, वोटर आईडी या पैन कार्ड
बैंक पासबुक
भूमि का रिकॉर्ड (ROR)
फसल बोने का घोषणा पत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. क्या बटाईदार किसान भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यदि उनके पास वैध भूमि अनुबंध है।
प्रश्न 2. कटाई के बाद बारिश से फसल खराब हो जाए तो क्या मुआवजा मिलेगा?
उत्तर: हाँ, कटाई के बाद 14 दिनों तक हुए नुकसान पर कवरेज मिलता है।
प्रश्न 3. खरीफ धान पर कितना प्रीमियम देना पड़ेगा?
उत्तर: केवल 2 प्रतिशत।
प्रश्न 4. बुवाई न हो पाने पर क्या लाभ मिलेगा?
उत्तर: किसान को 25 प्रतिशत तक मुआवजा मिलता है।
प्रश्न 5. हिमाचल प्रदेश के किसानों को प्रीमियम देना होगा?
उत्तर: नहीं, पूरा प्रीमियम सरकार देती है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2025 किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण और कारगर योजना है। यह योजना न केवल किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा देती है बल्कि उनकी आय और आजीविका को भी स्थिर करती है। कम प्रीमियम, व्यापक कवरेज और समय पर मिलने वाले मुआवजे के कारण यह योजना किसानों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है।
किसान यदि इस योजना का सही समय पर लाभ लें, तो वे अपनी खेती को और अधिक सुरक्षित बना सकते हैं।









